साइबर ठगों ने फर्जी लोन एप के जरिये एक व्यक्ति को शिकार बना लिया। उनके बैंक खाते से 17 लाख रुपये उड़ा लिए। साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच के लिए विशेष टीम का किया गठन।
देहरादून: लुनिया मोहल्ला निवासी व्यक्ति को एक एसएमएस मिला था। इसमें इंस्टेंट लोन दिलाने का दावा किया गया था। इसमें एक लिंक भी था। इस पर क्लिक किया तो उनके मोबाइल में एक एप डाउनलोड हो गया। कुछ देर बाद फोन करने वाले ने खुद को एप का एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर बताया और उनसे कुछ डिटेल ली। कागजों के वेरिफिकेशन के नाम पर कई तरह के दस्तावेज मंगाए गए। उनसे तमाम जानकारियां हासिल करने के बाद ठगों ने विभिन्न शुल्क के नाम पर पैसे मांगे। इस बीच उन्हें एक लिंक के माध्यम से फार्म भरने को कहा गया। जैसे ही उन्होंने इस फार्म को भरा, उनके बैंक खाते से 17 लाख रुपये किसी अन्य खाते में ट्रांसफर हो गए।
डीएसपी अंकुश मिश्रा ने बताया कि इस मामले में साइबर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मुकदमे की विवेचना के लिए चार लोगों की एक विशेष टीम बनाई गई है।
इसके लिए बहुत सी जानकारियां पीड़ित व्यक्ति से लेकर उनका मिलान किया जा रहा है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी फर्जी लोन एप के बारे में सूचनाएं मिली हैं। इन पर पीड़ित व्यक्तियों के संबंध में भी जानकारियां हैं।
75 से 80 फर्जी लोन एप बंद कराने की कार्रवाई
डीएसपी ने बताया कि टीम ने काम शुरू कर दिया है। शुरुआत में 75-80 फर्जी लोन एप को चिन्हित किया गया है। इन्हें बंद कराने के लिए केंद्रीय पोर्टल को रिपोर्ट भेजी जा रही है। फर्जी लोन एप के नाम पर मैसेज भेजने वाले 70 एसएमएस हेडर को भी बंद कराया जा रहा है।
छह करोड़ एसएमएस किए गए थे ब्लॉक
इससे पहले फर्जी वेबसाइट और अंतरराष्ट्रीय फर्जी वेबसाइट के माध्यम से धोखाधड़ी करने के मुकदमे में साइबर पुलिस ने कार्रवाई की थी। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून ने छह करोड़ एसएमएस को ब्लॉक कराया गया था। यह कार्रवाई देशभर में सराही गई थी।


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